Posts

दर्द की बात ना करो

Image
दर्द की बात ना करो, हम तो दर्द में ही रहते हैं। हर रोज घुटते-मरते हैं, पर किसी से नहीं कहते हैं। वक्त ने जो भी किया सितम सब हँस-हँस कर सहते हैं। हम तो वो गुलाब हैं जो रोज काँटों की चुभन सहते हैं। काँटों की चुभन सहकर भी खिलखिला कर हँसते हैं। किससे करे शिकायत ? जख्म देने वाले भी तो अपने हैं। हम तो अपने के भीड़ में भी अकेले रहते हैं। दर्द की बात ना करो, हम तो दर्द में ही रहते हैं। —लक्ष्मी सिंह 

कभी सावन,कभी वसंत दोस्ती।

Image
कभी सावन,कभी वसंत दोस्ती। पतझड़ में भी रहे संग दोस्ती। सागर के संग तरंग दोस्ती। जीवन में भर दे उमंग दोस्ती। इन्द्रधनुष के सातों रंग दोस्ती। मन को महका दे वो सुगंध दोस्ती। मौसम सा आना जाना है दोस्ती। यादों का विशाल खजाना है दोस्ती। याद आती है छुटपन की दोस्ती। निस्वार्थ थी बचपन की दोस्ती। कभी मार-पीट,झगड़ा-लड़ाई दोस्ती। कभी तीखी सी मिर्ची मिठाई दोस्ती। मस्ती भरी जवानी की दोस्ती। यारो पे दे देती कुर्बानी दोस्ती। सदा करती मनमानी नादानी दोस्ती। दिल में छोड़ जाती निशानी दोस्ती। बुढापे में किस्से कहानी दोस्ती। आँखों में ला देती पानी दोस्ती। बुजुर्गों का होता सहारा दोस्ती। भँवर जिन्दगी का किनारा दोस्ती। हर मौसम में है खास दोस्ती। एक धागा विश्वास का दोस्ती। कभी खड़ा करता नहीं सवाल दोस्ती। बहुत ही लाजवाब व बेमिशाल दोस्ती। -लक्ष्मी सिंह 

खुशी आत्मा की उपज है

Image
खुशी आत्मा की उपज है। सबको मिलती नहीं सहज है। कोई एक गुलाब से भी खुश हो जाता है। कोई मँहगा तोफा पाकर भी आँसू बहाता है। खुशी मन का एक भाव है। खुशी सकारात्मक प्रभाव है। कोई लाखो कमा कर रोता है। तो कोई भूखे पेट भी हँसता है। खुशी मन की भावना का उदगार है। खुश रहना हर व्यक्ति का अधिकार है। खुशी प्रसन्नता की एक झलक है। खुशी की हर व्यक्ति को ललक है। खुश रहने का एक राज है। खुशी बाँटना मेरा अंदाज है। जहाँ खुशी रहती वहाँ आशा है। जहाँ खुशी नहीं वहाँ निराशा है। खुशी मन की एक भाषा है। खुशी की नहीं कोई परिभाषा है। सब खुश रहे बस इतनी सी अभिलाषा है। —लक्ष्मी सिंह 

प्रतिबद्ध मन

Image
मकसद है, दूरदर्शिता है, योजना भी है, मंजिल तक पहुँचने की। कमी होती है तो बस लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्ध मन की। आधे-अधूरे मन से काम करने की प्रवृत्ति हमें सपनों से दूर कर देती है। कई मौकों का दम धोट देती है —लक्ष्मी सिंह