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कुछ अजीब से रिश्ते

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ललित छंद कुछ अजीब सी ये दुनिया है, कुछ अजीब से रिश्ते। कुछ बन जाते दोस्त यहां पे, तो कुछ बने फरिश्ते।। कोई याद जख्म के जैसे, कोई मरहम जैसे। कहीं दर्द का रिश्ता होता, कही प्यार के रिश्ते।। कुछ रिश्ते दिल से जुड़ जाते, कुछ मतलब के होते। निभे सात जन्मों के होते , विश्वास भरी रिश्ते।।। कुछ सुलझे अनसुलझे होते, रिश्तों के ये धागे। कुछ लम्बे दूरी तक चलते, पल में टूटे रिश्ते।। कुछ खून से जुड़े होते हैं, कुछ इज्जत के होते। कहीं सूत कच्चे धागे के, प्रेम – प्यार के रिश्ते।। हर्ष की शुभकामनाओ से, जो मन को हुलसाते। कई रंग में रंगे दिखते, मेहमान के रिश्ते।। जो सदा ही मधुर बंधन में, सबको बाँधे रखते। बन जाती मधुबन जीवन ये, मधुर वरदान रिश्ते।। सभी एक माला के मोती, इनसे दुनिया चलते। जो खरीदे से नहीं मिलते, बड़े अनमोल रिश्ते।। —लक्ष्मी सिंह 

बहुत दिन हुए अब तो चले आओ

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बहुत दिन हुए अब तो चले आओ। मुहब्बत में इतना हमें ना तड़पाओ । राह खड़ी हूँ बन के फरियादी, विरह की अग्नि में यूँ ना जलाओ। तेरी ये सजनी तो तप्ती मरू है, बुझा दो हिया की अगन ना सताओ। सुना है मेरे मन का कोना – कोना, आकर के गुंजा वफा का खिलाओ। हम दासी हैं तेरे जन्मों जनम से, आकर सजन मोहे गरवा लगाओ। गम – ए जुदाई अब सहा नहीं जाता, फिर से दीप मधुर मिलन का जलाओ। -लक्ष्मी सिंह 

पहला – पहला प्यार

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 ललित छंद पहला – पहला प्यार जगत में, माँ का ही होता है। भगवान जैसा प्यार माँ के, प्यार से झलकता है।। हर बच्चे का पहला रिश्ता, माँ से ही जुड़ता है। फिर किसी रिश्ते को बनाने, के काबिल बनता है।। वो प्रथम शब्द, पहला सरगम, माँ की ही लोरी है। कानों में जो मिसरी घोले, माँ की ही बोली है।। पहला आलिंगन, पहला छुअन, माँ का ही होता है। पहली थपकी, पहली चुंबन, माँ का ही होता है।। हर सही गलत का भेद प्रथम, माँ ही समझाती है। इस दुनिया में कैसे जीना, हमको बतलाती है।। माँ छोटी-बड़ी जरूरत का, सदा ध्यान रखती है। मेरी पसंद ना पसंद का, जिसे ज्ञान रहती है।। कभी शिक्षक,कभी चिकित्सक माँ, आया बन जाती हैं। माँ बच्चों के खातिर देवों, से भी लड़ जाती हैं।। औलाद के हर सितम को माँ, हँस कर सह जाती हैं। बच्चों के हर गलती को माँ, माफी दे जाती हैं।। दुनिया में जो रिश्ते बनते, वो सब प्यारे होते। सभी रिश्तों में सबसे बड़ा, माँ का रिश्ता होता।। तुम पहला प्यार उसे पूछो, जिसे माँ नहीं होती। माँ के ममता के खातिर जो, आँखें हरदम रोती। ...

आया शरद पूर्णिमा की महारास

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सभी दोस्तों को शरद पूर्णिमा की बहुत-बहुत शुभकामनाएँ   🌹 🌹 🌹 🌹 🌹 🌹 आया शरद पूर्णिमा की महारास।   अद्भुत, दिव्य, अनुपम, मधुमास।   सोलह कलाओं से परिपूर्ण चंद्रमा,   सुन्दर,शीतल,मनमोहक अति खास।   सुख शांति समृद्धि की अमृत वर्षा,   पीकर बुझी है वसुंधरा की प्यास।   दुख दर्द व्याधि स्वतः विच्छेदित,   तृप्त हुआ है पूरी सृष्टि की आस।   देव लोग उतरे आज वसुधा पर,   कृष्ण करे गोपियों संग महारास।   🌹 🌹 🌹 🌹 🌹 -लक्ष्मी सिंह   💓 ☺