मैं रात अंधियारी चंद्र प्रकाश बन आ जाना। मेरे मन के आँगन में स्नेह दीप जला जाना। शीतल,निर्मल,स्निग्ध चाँदनी सी अति सुन्दरतम्, मंत्र मुग्ध करे कुछ ऐसी दास्तां सुना जाना। —लक्ष्मी सिंह
चोर और डाकू तो सिर्फ धन लूटते हैं। उससे बड़े अपराधी धन, तन लूटते हैं। पर श्रद्धा के लुटेरे सबसे बड़ा लुटेरा, ये तन, मन, धन, के साथ जीवन लूटते हैं। - लक्ष्मी सिंह
कसूर बेटी किस कसूर, किस अपराध की सजा पाती है। कभी गर्भ, कभी दहेज के नाम मारी जाती है। घर-बाहर कहीं भी सुरक्षित नहीं है बेटियाँ, दुष्ट-दरिंदों-गिद्ध की निगाहें यहां रुलाती है। —लक्ष्मी सिंह
🌹 🌹 🌹 🌹 🌹 मुस्कुराता, इठलाता,ये बचपन प्यारा-प्यारा। जीवन की जीवन्तता, मस्ती के पल ढेर सारा। बेपरवाह, निश्चित, मासूमियत, शरारत से भरा, ईश्वर की देन बचपन जिसे वे दिल से संवारा। 🌹 🌹 🌹 🌹 —लक्ष्मी सिंह 💓 ☺