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छठ पूजा

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🌹 🌹 🌹 🌹 छठ पूजा बड़ा ही  पवित्र व पावन महान। सादगी पवित्रता का  रखा जाता है ध्यान। नदी, तालाब, पोखर किनारे संगठित हो, करते सभी सूर्य देवता   को अर्घ्यदान। —लक्ष्मी सिंह  💓 ☺

छठ

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🌹 🌹 🌹 🌹 🌹 छठ पूजा रीति रिवाज के  रंगों में प्रकृति की उपासना। डूबते उगते सूर्य देव की  अनुष्ठान और अराधना। पारिवारिक सुख,शांति,वैभव,   स्वस्थ, निर्मल, निरोगी काया, तथा मनोवांछित फल को   प्राप्त करने की मंगल कामना।   -लक्ष्मी सिंह   💓 ☺

तुम जो आये बहार आई है

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🌹 🌹 🌹 🌹 🌹 🌹 तुम जो आये बहार आई है  दिल की हर कली मुस्कुराई है। छोड़कर मुझको अब नहीं जाना  सहना मुश्किल तेरी जुदाई है। वक्त कटता नहीं काटे तुम बिन   सर्प सी डसती ये तन्हाई है।   🌹 🌹 🌹 🌹 -लक्ष्मी सिंह   💓 ☺

हँसते चेहरे का दर्द

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🌹 🌹 🌹 🌹 हँसते चेहरे का दर्द दिखाई नहीं देता। हँसने वाला आँसू की  दुहाई नहीं देता। लोग तो कह देते हैं कि   भला इसे क्या गम है टूटते दिल की आवाज   सुनाई नहीं देता। —लक्ष्मी सिंह  💓 ☺

बेटियाँ जब भी अपने मायका आती है

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🌹 🌹 🌹 🌹 🌹 🌹 बेटियाँ जब भी अपने मायका आती है।  लेने नहीं बहुत कुछ देने ही आती है। दुआओं का अमृत कलश वो साथ लाती है,  बेटियाँ बोलो कब खाली हाथ आती है। बेटियाँ जिस दहलीज पर कदम रखती वहाँ,   उसके कदमों के नीचे लक्ष्मी आती है। भाई और भतीजे की नजरें उतार कर,   उनकी सभी बलैया ले लेने आती है। बेटियाँ शुभकामनाएँ, शुभ आशीषों की,   सुखद सुमधुर स्नेहिल वृष्टि करने आती है। धुंधलाते यादों के सभी अवशेषों को,   मन की हर कोने में सहेजने आती है। अपने दिल की गहराईयों से जुड़ा हुआ,   अपनी जड़ों को फिर से सींचने आती है। अपने सारे तनाव व दुख दर्दों से दूर,   सुकून के कुछ पल वहाँ बिताने आती है। माँ के हाथों से बनी हुई कुछ खाते ही,   बेटी की आँखें बरबस भर ही आती है। जाते-जाते अपना सब वही छोड़ जाती,   बेटियाँ मैके कुछ लेने नहीं आती है।   🌹 🌹 🌹 🌹 —लक्ष्मी सिंह   💓 ☺

मष्तिष्क

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🌹 🌹 🌹 🌹 🌹 🌹 क्षीर कलश अन्तःचेतना का ज्ञान   मष्तिष्क है विशाल सागर महान।   जिसके भीतर अनन्त चीजे छिपी,   विचार भावनाएं लहर के समान।   🌹 🌹 🌹 🌹 —लक्ष्मी सिंह   💓 ☺