Posts

Showing posts with the label दोहा छंद

श्याम नाम

Image
माधव,मधुसूदन,मदन,मनमोहन,घनश्याम। कितने तेरे रूप हैं ,कितने तेरे नाम।।१ महिमा तेरे नाम की , जपते भव से पार। श्याम नाम की ज्योति से ,जीवन हो गुलजार।।२  मत भूलो श्री श्याम को ,जाना सागर पार। जीवन छोटी नाव है,श्याम नाम पतवार।।३ श्याम भजन का तो नहीं ,कोई निश्चित काल। जप लो जब मौका मिले ,प्रभु हैं दीन दयाल।। ४ जीवन नैया सौंप दे ,प्यारे प्रभु के नाम। श्याम नाम सुमिरन करें ,बन जायेगा काम।।५ श्याम नाम जो भी जपा  ,उसका बेड़ा पार। डरना फिर किस बात से ,रक्षक जब सरकार।।६ -लक्ष्मी सिंह 

परिवार

Image
🌹 🌹 🌹 🌹 🌹 🌹 प्रथम इकाई रूप में, उदय हुआ परिवार।  एक अच्छे समाज के, है निर्माणाधार।  एक अभिन्न अंग है, जीवन का परिवार।  प्रेम - स्नेह से सींच कर, स्वर्ग बने घर-द्वार।  तिनका तिनका जोड़कर, बनता है आवास।  एक सम भाव हो जहाँ, सुख-शांति का निवास।  तिनका-तिनका टूट कर, बिखर रहा परिवार।  मानव हृदय घुल रहा, यहाँ कैसा विकार  🌹 🌹 🌹 🌹 🌹 —लक्ष्मी सिंह  💓

मुरली वाले

Image
🌹 🌹 🌹 🌹 🌹 🌹 मुरली वाले मोहना, मुरली मधुर बजाय।  तेरी मुरली मन हरे, सुध-बुध दे बिसराय।।  🌹 🌹 🌹 🌹 —लक्ष्मी सिंह  💓 ☺

तुलसी महिमा

Image
तुलसी भारत देश में, पूजनीय कहलाय। युग-युग से तुलसी यहाँ, देवी मानी जाय।। 1 तुलसी हिंदू धर्म में, जग जननी कहलाय। आँगन की शोभा बनी, घर-घर पूजी जाय।। 2 तुलसी का नभ है पिता, धरती मात कहाय। शालिग्राम भगवान ने, उनसे ब्याह रचाय। 3 एक पौधा तुलसी का, आँगन बीच लगाय। अपनी वास सुवास से, घर-आँगन महकाय।। 4 बिन तुलसी के पात के, प्रभु को भोग न भाय। राम भक्त हनुमान तो, भूखे ही रह जाय।। 5 तुलसी बन संजीवनी, हर दुख दर्द भगाय। सुख, शांति व स्नेह, धारा, जड़ में रखे छुपाय।। 6 तुलसी एक औषधि है, तन को रखे निरोग। बीज, तना, जड़, पत्तियाँ, सब आये उपयोग।। 7 अर्ध्य श्रद्धा व नेह का, हर चोट का उपाय। तुलसी रंगत में दिखे, मुझको मेरी माय।। 8 तुलसी में हर शाम को, दीपक रखें जलाय। देवी कृपा बनी रहे, सुख संपति घर आय।। 9 तुलसी घर-आँगन बसे, एक वैद्य समान। सस्ती, सहज, उपयोगी, ये गुणकारी खान।। 10 शिव को शंख गणेश को, तुलसी नहीं चढ़ाय। ऐसा जो कोई करे, घर अमंगल बुलाय।। 11 जन्म से मौत तक हमें, तुलसी आती काम। वृंदा देवी को सदा , नित उठ करें प्रणा...

वक्त

Image
🌹🌹🌹🌹🌹 विधा - दोहा छंद 🌹🌹🌹🌹🌹 वक्त एक ऐसा गुरू, बिना कहे दे ज्ञान। जीवन में जीता सदा, जिसे वक्त का भान।। 1 वक्त बेवक्त वक्त में, ऐसा वक्त दिखाय। जीवन भर भूले नहीं, ऐसा सबक सिखाय।। 2 वक्त कटे कटता नहीं, दर्द भरी है रात। कोई भी साथी नहीं, समझे मन की बात।। 3 वक्त बुरा जब आय तो, उम्मीदों को थाम। कर्म सदा करते रहो, लेकर प्रभु का नाम।। 4 चलता ही रहता सदा, वक्त बड़ा बलवान। ढला वक्त अनुरूप जो, वही है ज्ञानवान।। 5 चाल बहुत ही तेज है, वक्त सदा गतिमान। नापे जाये जो इसे, होता वही महान।। 6 वक्त किसी का भी नहीं, इसे न कोई चाह। ये नियत वेग से चले , कभी रूके न राह।। 7 रोक न पाये वक्त को, अनल वायु की चाल। फांस न पाये वक्त को, आखेटक के जाल।। 8 वक्त बदलता है सदा, बदल वक्त के साथ । जीवन में अपने सदा, चल उसूल के हाथ।। 9 वक्त बीतता जा रहा, रह जाती बस याद। वक्त गुलाम किया हमें, खुद घूमे आजाद।। 10 काम वक्त पर जो किया, मन में खुशी समाय। अगर वक्त पर ना किया, वो पीछे पछताय।। 11 वक्त गुजर जो भी रहा, वे इतिहास बनाय। ये तो कल का आज को, दर्पण एक दिखाय।। 12 🌹🌹🌹🌹 —...

राख

Image
विधा - दोहा  🌹🌹🌹🌹🌹🌹 राख तन पे लगाय के, बसहा बैल सवार। शिव के दम पे है खड़ा, ये पूरा संसार।। 1 दुर्बल नारी जान के, मत करना अपमान। चिंगारी है राख में, क्षण में लेगी जान।। 2 रिश्तों में विश्वास है, कभी न हो कमजोर। आज राख जल हो रही , रिश्तों की हर डोर।। 3 अहंकार जो भी किया, मिटा हो गया खाक। रूई लिपटी आग ज्यों, जलकर होती राख।। 4 नारी के उत्थान की, जोर शोर से बात। फिर क्यों नारीआज भी, जलकर होती राख।। 5 देखो फाँसी चढ़ रहा, अपना आज किसान। खेत जल राख हो गया, टूटा हर अरमान।। 6 बेटी से बनकर बहू ,रही निभाती धर्म। राख  जला कर के किया, आयी तनिक न शर्म।। 7 ईर्ष्या जैसी आग को, मन में कभी न राख। जलभुन कर जीवन सदा, इसमें होता राख।। 8 मानव हठ स्वभाव तो ,चिता संग ही जाय। रस्सी जलकर राख हो, ऐठन कभी न जाय।। 9 चिंता चिता समान है, तन मन करती राख। एक बार जलते चिता, चिंता में दिन रात। 10 छैल छबेली मोहिनी, हँस हँस मारे आँख। देख पड़ोसी जल मरा,बिन माचिस के राख।। 11 मानव तन नश्वर सदा, मत करना अभिमान। शेष बचेगी राख ही, तन जलते श्मशान।। 12  🌹🌹🌹🌹 –लक्ष्म...